यात्रा डायरी
कनाडा से चिट्ठी: आठ
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लड्डू के बीच इलायची का दाना
अगस्त के दूसरे सप्ताहांत
में एक बार फिर टोरंटो भ्रमण का कार्यक्रम बन गया। पिछली बार सीएन टावर, रिप्लीज फिश एक्वेरियम और हार्बर फ्रंट
क्षेत्र का आनन्द उठाया था। इस बार टोरंटो डाउन टाउन में यूनियन स्टेशन क्षेत्र के
अलावा 'रॉयल ओंटेरियो म्यूजियम' और 'आर्ट गैलरी ऑफ ओंटेरियो' का अवलोकन हमारा खास मकसद
रहा।
न्यूमार्केट शहर से गो
ट्रेन से करीब 11 बजे के
आसपास हम लोग यूनियन स्टेशन पहुंच गये थे। स्टेशन के बाहर निकलकर कुछ देर पैदल ही
घूमने निकले। टोरंटों के इस क्षेत्र में बहुत ऊंची इमारतें सारे आसमान को जैसे ढंक
ही लेती हैं। इमारतें शायद 50 मंजिलों या उससे भी अधिक ऊंचाई
की हैं। बहुत सटी हुई और घनी होने के बावजूद बीच में सड़कें और खुला क्षेत्र और
चौराहे काफी खूबसूरत नजर आते हैं। और सबसे ऊपर आकाश में सीएन टॉवर का शीष तो हर
जगह से नजर आ ही जाता है।
अनेक अंतरराष्ट्रीय बैंकों
के कार्यालयों के अलावा स्टेट बैंक का नीला सफेद बोर्ड दिखाई दिया तो किसी इंदौरी
को जैसे पोहा जलेबी ही मिल गया। यह अनुभूति अद्भुत थी, मोतीचूर के लड्डू के बीच जैसे इलायची
का दाना मुंह में खुशबू बिखेर गया हो। सप्ताहांत होने से सभी दफ्तर बन्द थे। भारत
होता तो शायद मेरा मालवी मन गार्ड से ही उसकी खैर खबर अवश्य पूछकर लौटता।
इस इलाके में काफी भीड़ भाड़
दिखाई दी। ट्रैफिक भी सिग्नलों की वजह से बहुत रुक रुककर आगे बढ़ रहा था। उपयुक्त
मौसम और वीकेंड होने से पर्यटक काफी तादाद में दिखाई दिए। ज्यादातर लोग मौज मस्ती
के मूड में तस्वीरें लेते, कॉफी पीते,ठिठकते,मुस्कुराते नजर आए। बिल्डिंगों और सड़कों के
साथ खूबसूरत हिरयाली, सुंदर स्टेचू और स्ट्रक्चर आकर्षित
करते रहे।
इसी बीच हमारी उबर कैब आ
गई। कोई 10 मिनट की
यात्रा के बाद हम लोग विश्व के एक बड़े और महत्वपूर्ण संग्रहालय 'रॉयल ओंटेरियो म्यूजियम' जिसे यहां संक्षेप में 'आर ओ एम' 'रोम' कहा जाता है के
सामने तस्वीरें ले रहे थे।
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टोरंटो का 'रोम'
'रोम'
अर्थात टोरंटों में स्थित 'रॉयल ओंटेरियो
म्यूजियम' के टिकिट काउंटर पर पर्यटकों भीड़ तो थी लेकिन
काउंटरों की संख्या भी पर्याप्त होने से ज्यादा समय नहीं लगा और 5 मिनट में हम लोग इस विशाल संग्रहालय के पहले तल में प्रवेश कर गए।
संग्रहालयों के बारे में
सोचते ही हमारे मन में एकदम हैदराबाद का 'सालारजंग म्यूजियम' आ जाता
है। विशालता में यह उसके बराबर ही मुझे लगा। थोड़ा बहुत 21/20 का फर्क होगा। कुल पांच तलों में इसका विस्तार है। सीढ़ियों के अलावा
लिफ्ट्स भी हैं, तो ज्यादा दिक्कत नहीं है लेकिन गैलरियों और
प्रखंडों में तो चलकर जाना ही होता है। कम से कम 5 किलोमीटर
का वॉक तो हो ही जाता होगा। प्रवेश द्वार पर ही नक्शा मिल जाता है, तदनुसार हम आगे बढ़ते रहे।
1914 में
स्थापित, 'रॉयल ओंटारियो संग्रहालय' दुनिया
भर की कला, संस्कृति और प्रकृति की कुछ खास चीजों को
प्रदर्शित करता है। उत्तरी अमेरिका के शीर्ष 10 सांस्कृतिक
संस्थानों में इसका शुमार होता है। कनाडा के इस सबसे बड़े और सबसे व्यापक संग्रहालय
में 13 मिलियन कलाकृतियों, सांस्कृतिक
वस्तुओं और प्राकृतिक इतिहास के नमूनों का एक विश्व स्तरीय संग्रहण किया गया है।
लगभग 40 गैलरियों और प्रदर्शनी स्थलों में विश्व के विभिन्न
महाद्वीपीय खण्डों पर केंद्रित वस्तुओं को स्थान देने के प्रयास किये गए हैं।
चीन,जापान,कोरिया,
अफ्रीका,यूरोप,कनाडा आदि
के अलावा भारतीय उप महाद्वीप के सांस्कृतिक,कलात्मक और
ऐतिहासिक मॉडल्स को भी यहां देखा जा सकता है। एक गैलरी में विश्व की थल सेनाओं के
मॉडल्स के बीच बंगाल रेजिमेंट भी दिख गई। वन्य जीवों, जल
प्राणियों के अलावा एक बड़ा प्रखंड डायनोसोर केंद्रित है। न सिर्फ बच्चों को बल्कि
बड़ों को भी यह बहुत प्रभावित करता है। आकर्षण के लिहाज से यह हाल फिलहाल सबसे आगे
है।
यहां कुछ अंतराल से
सांकृतिक गतिविधियां भी होती रहती हैं।जोधपुर राजस्थान पर केंद्रित एक सांकृतिक शो
भी यहां अतिरिक्त शुल्क के साथ चल रहा था। लेकिन वक्त की कमी की वजह से हमने इसका
लाभ नहीं लिया।
कनाडा के प्रमुख क्षेत्र
अनुसंधान संस्थान के रूप में 'रोम' नई खोजों के साथ कलात्मक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक दुनिया की हमारी समझ को और आगे बढ़ाने में
निसंदेह एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
सबसे अनोखी गैलरी खनिज और
ज्वेल्स और विभिन्न उल्का पिंडों के टुकड़ों के संग्रहण, प्रदर्शन की थी। मंगल, चाँद से लेकर पृथ्वी के गर्भ से प्राप्त स्टोन्स और उनके तराशे स्वरूप
यहां बहुत रोमांचित कर देते हैं। गोल्ड,सिल्वर और अन्य
धातुओं के रा और फिनिश्ड स्वरूप देखना अच्छा लगता है। चमगादड़ों से संबंधित गैलरी
भी देखना कुछ अलग अनुभूति रही।
टेक्सटाइल से प्रदर्शनी में
चीन से सम्बंधित चीजों ने आकर्षित किया,वहीं कुछ पुरातन वाद्य यंत्रों को देखना,सुनना भी रुचिकर था।
इस म्यूजियम में एक बात ख़ास
लगी कि प्रत्येक गैलरी में रखी चीज से संबंधित जानकारी और उसका वीडियो पास में रखे
कम्प्यूटर स्क्रीन पर बटन दबाकर देखी,समझी जा सकती थी। इसके अलावा पर्यटकों के भोजन के
लिए यहां एक सुसज्जित लंच रूम की व्यवस्था है जहां हमने भी सुकून से साथ लाया लंच
किया और थोड़ा सुस्ताए भी।
डेनियल लिबेस्काइन्ड द्वारा
डिज़ाइन किये माइकल ली-चिन क्रिस्टल द्वारा अपनी मूल वास्तुकला के साथ विकसित ROM (संग्रहालय) टोरंटो में आये
सांस्कृतिक,प्रकृति,जन जीवन और इतिहास
में रुचि रखने वाले हरेक पर्यटक का मन मोह लेता है।
दोपहर तीन बजते हमने 'आर्ट गैलरी ऑफ ओंटेरियो' का रुख किया। जो टैक्सी से यहां से 10 मिनट की दूरी
पर स्थित थी।
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कलायात्रा में साथ थे मेरे अपने
टोरंटो स्थित 'आर्ट गैलरी ऑफ ओंटेरियो' को
देखने की अधिक इच्छा इसलिए भी हो गई कि 'रॉयल म्यूजियम'
में पेंटिंग्स और शिल्प की भूख ठीक से शांत नही हो पाई थी। आधुनिक
चित्र कला और शिल्प के नए प्रयोग यहां थोड़ा कम प्रदर्शित किये गए लगे। जो लगभग
नहीं के बराबर थे। सालारजंग म्यूजियम हैदराबाद में कला दीर्घा कुछ अधिक विस्तारित
है। आर्ट गैलरी ऑफ ओंटेरियो AGO हमारी क्षुधा को कुछ हद तक
शांत करने में सक्षम रही।
कनाडा के सबसे बड़े शहर टोरंटो में स्थित
यह आर्ट गैलरी (AGO) उत्तरी अमेरिका के
सबसे बड़े कला संग्रहालयों में से एक है। लगभग 95,000 कृतियों
के संग्रह में अत्याधुनिक समकालीन कला से लेकर यूरोपीय कृतियों के बड़े कलाकार
इसमें शामिल हैं। स्थानीय कनाडाई कलाकारों के समूहों तथा उदयीमान युवाओं के काम भी
यहां संजोए गए हैं। इसके अलावा फोटोग्राफी,वास्तुशिल्प
कलाकृतियां, मॉडर्न शिल्प कला , फर्नीचर
शिल्प,काष्ठकला में विश्व के कई कलाकारों के नए प्रयोग भी
देखे जा सकते हैं।
इस आर्ट गैलरी में छोटे बड़े मूर्ति शिल्प
के अलावा छायाचित्र, रेखांकन, विभिन्न शैलियों और माध्यमों में आकर्षक पेंटिंग्स देखकर बहुत से अपने याद
आये। इन्हें देखते हुए काश हमारे साथ प्रभु जोशी या रवींद्र व्यास भी साथ रहे
होते। कई छाया चित्रों को देखकर देवास के भाई कैलाश सोनी का कला के प्रति वह आग्रह
याद आया जो खास किस्म के प्रकाश के लिए मीठा तालाब पर सूर्यास्त की प्रतीक्षा किया
करते थे।
कुछ काष्ठ शिल्पों में प्रो नईम साहब को
रंदा और रेजमाल रगड़ते लकड़ी पर गणेश प्रतिमा उभारते महसूस किया। प्रो अफजल का रंग
भरा चाकू, प्रभु दा के जलरंग
चित्रों का वह अनोखा लाल रंग का छींटा ढूंढता रहा यहां। रवींद्र व्यास का हरा रंग
गुलाबी और पीली आभा में ठहाका लगाता नजर आया। स्केचों में विष्णु भटनागर और संतोष
जड़िया को कुछ शिल्पों के जरिये अपने साथ बनाये रखने की कोशिश की।
स्व वाकणकर गुरूजी उस वक्त बहुत याद आये
जब बैग्स और जूतों के माध्यम से बनाये शिल्प दिखाई दिए।गुरुजी दीवार के उखड़े
पलस्तर और यूँही बिखरी वस्तुओं को अरेंज कर पेंटिंग बना देते थे। कोलाज के अनोखे
प्रदर्शनों पर ऐसा लगा जैसे मित्र श्रीराम जोग मेरे साथ हो गए हों। इन सबका स्नेह
और उनसे जुड़ाव का ही नतीजा था कि आर्ट गैलरी के आनन्द को भीतर तक महसूस कर पाया।
ब्रायन जुंगेन फ्रेंडशिप सेंटर की
मूर्तिकला बेहद अनोखी लेकिन आधुनिकतम थी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित कलाकारों
का यह नया दृष्टिकोण था जिसमें केनवास बैग्स, जूतों,फीतों आदि के फाइलिंग से शिल्प और मुखौटों की
रचना की गई थी।
यहां इस तरह के काम की यह अब तक की सबसे बड़ी प्रदर्शनी थी।
कलाकारों ने मौजूदा उपभोक्ता उत्पादों के साथ बार-बार ऐसे अनेक प्रयोग किये हैं,
उन्हें नए रूप देकर दर्शकों को काफी प्रभावित भी किया है।
इसी तरह फर्नीचर शिल्प, मिरर शिल्प और कंस्ट्रक्शन शिल्प भी बहुत भौचक्क कर
देने वाला था। एक पूरे कमरे के कोने में मिरर और गिट्टियां कुछ इस तरह रखी गईं थीं
कि शिल्प का निर्माण करती थीं। एक कमरे में सीमेंट की बोरियों,बल्लियों के मात्र संयोजन से कलाकृति बनाई गई थी।
एक कलाकार ब्रास ने कपड़े और शरीर के
अंगों के प्लास्टर का उपयोग करते हुए अनोखे शिल्प का सृजन किया था। सामग्री से
उन्होंने एक झांकी बनाई थी जिसमें पहले कोई मॉडल सामग्रियों को शरीर पर ढालते हुए
विशिष्ट वस्त्रों के साथ काम करती है। बाद में ब्लास कास्टिंग, नक्काशी और वस्तुओं के संयोजन से उन्हें अपनी
मूर्तियों में बदल देतीं हैं। इस तरह वे यथार्थवाद, अतिसूक्ष्मवाद
और क्यूबिज़्म पर ड्राइंग करके वह अमूर्त, मानव और निर्जीव
रूपों के इस शून्य स्थानों को अभिव्यक्त करती हैं। इस शिल्प को देखना अद्भुत और
नवीनतम अनुभव रहा हमारा।
ओंटारियो के पर्यटन, संस्कृति और खेल मंत्रालय द्वारा वित्त पोषित इस
समृद्ध आर्ट गैलरी को 'फिर मिलेंगे' कहकर
हमने विदा ली तो सचमुच मन में सतरंगी इंद्रधनुष खिला हुआ था......