यात्रा डायरी
कनाडा से चिट्ठी : नौ
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पर्यटन का राग भैरवी : नियाग्रा प्रपात
पर्यटन का राग भैरवी : नियाग्रा प्रपात
हमारे यहां संगीत सभा का चरमोत्कर्ष और समापन
सामान्यतः 'राग भैरवी' के गायन,वादन से होने की
परंपरा रही है। पिछले दिनों कनाडा प्रवास और सैर सपाटे में हमारे आनन्द का
सर्वोच्च निश्चित ही विश्वप्रसिद्ध 'नियाग्रा प्रपात' के रूप में प्रकृति का यह अद्भुत उपहार ही रहा।
नियाग्रा प्रपात यात्रा की इस खूबसूरत भैरवी की शुरुआत अगस्त माह की 17 तारीख को सुबह 7 बजे बारिश के रिमझिम संगीत से ही हो गई। न्यूमार्केट शहर के गो बस स्टॉप के लिए घर से निकलते ही आकाश से बूंदें बरसने लगी। दोपहर 12 बजे तक नियाग्रा फाल क्षेत्र में भी बरसात और बादल छाए रहने की संभावना थी। मुहूर्त बढ़िया था।
नियाग्रा प्रपात यात्रा की इस खूबसूरत भैरवी की शुरुआत अगस्त माह की 17 तारीख को सुबह 7 बजे बारिश के रिमझिम संगीत से ही हो गई। न्यूमार्केट शहर के गो बस स्टॉप के लिए घर से निकलते ही आकाश से बूंदें बरसने लगी। दोपहर 12 बजे तक नियाग्रा फाल क्षेत्र में भी बरसात और बादल छाए रहने की संभावना थी। मुहूर्त बढ़िया था।
एक घण्टे की यात्रा के बाद टोरंटो के यूनियन रेलवे
स्टेशन से विशेष पैकेज टूर की बुकिंग थी हमारी। ‘गो ट्रेन’ से 9 बजे रवाना होकर 11 बजे नियाग्रा फाल स्टेशन पर उतरने के बाद फाल तथा
अन्य पॉइंट्स तक जाने के लिए हमारे लिए ‘विगो बसेस’ सेवाएं उपलब्ध थीं।
पन्द्रह मिनट की बस यात्रा के बाद हम लोग इस विशाल
और खूबसूरत प्रपात के शुरुआती छोर के सामने प्रफुल्लित खड़े थे। मौसम भीगा भीगा था।
हल्की बारिश थी या प्रपात की हवा में घुलकर उछलती बूंदें कुछ कहा नहीं जा सकता।
बादल भी थे और धुंध भी। लेकिन धीरे धीरे रोशनी भी बढ़ रही थी और धूप भी अठखेलियाँ
खेलने लगी थी। मालवा के अपने जाने पहचाने 'चिड़ा चिड़ी' के विवाह जैसा ही मौसम था। आसामान में इंद्रधनुष खिलने का मैं इंतजार
करता रहा मगर यह आस पूरी नहीं हो सकी। शायद प्रपात की उछलती बूंदों और सूर्यकिरण
का कांटा नहीं भिड़ा। 12 बजते बजते मौसम बहुत साफ हो गया।
नदी किनारे कोई 100 फिट ऊपर लगी रेलिंग के साथ साथ आगे बढ़ते हुए देखने पर हर बार प्रपात
की भव्यता और खूबसूरती प्रत्येक कोण से निखरती जाती है। गहराई में पर्यटकों से भरे
बोट कोई 400
से अधिक यात्रियों को बिल्कुल निकट तक ले जाकर
तेज बौछारों में नहलाकर इसकी भव्यता और रोमांच का अहसास करा देते हैं।
दरअसल 'नियाग्रा जलप्रपात' अमेरिका के न्यूयॉर्क और कनाडा के ओंटारियो प्रांतों के मध्य
अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बहने वाली नियाग्रा नदी पर स्थित है। यह दुनिया के सबसे बड़े
और ऊँचे प्रपातों में से एक दर्शनीय जलप्रपात है। यह जलप्रपात न्यूयॉर्क के बफेलो
से 27 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम और कनाडा के टोरंटो (ओन्टारियो) से 120 किलोमीटर दक्षिण पूर्व में स्थित है।
घोड़े की नाल के आकार की तरह होने के कारण कनाडा
की साइड के प्रपात को 'हॉर्स शू प्रपात' कहा जाता है वहीं
अमेरिका वाली साडड पर दिखाई देने वाले को 'अमेरिकन प्रपात' कहते हैं। 'हॉर्स शू प्रपात' यहाँ आने वाले
पर्यटकों को ऐसे निरीक्षण कक्ष में ले जाते हैं, जहां गिरते पानी के
बीच खड़े होने का अहसास होता है। अमरीका साइड और कनाडा साइड से चलने वाले विशाल
बोट पर्यटकों को प्रपातों के मध्य तक दिन भर सैर करवाते रहते हैं। हम लोगों ने भी
इस रोमांच का भरपूर मजा लिया।
जीवन में बहुत ज्यादा पर्यटन तो अभी तक ख़ास किया
नहीं, पर जितना कुछ भी देखा उसका आनन्द बहुत दिल से लिया है। मध्यप्रदेश का भेड़ाघाट
हो या गांधीसागर बांध, नेमावर हो या महेश्वर, बागली, उदयनगर या नीमच, भानपुरा क्षेत्र के
जंगल, प्राकृतिक छटा हमारे यहां भी समृद्ध और अद्भुत है। लेकिन प्राकृतिक संसाधनों
से राजस्व जुटाने के साथ पर्यटकों को लुभाने में हमारे नीति नियंताओं का दृष्टिकोण
अभी उतना कारगर साबित नहीं हुआ है जितना इधर मुझे देखने को मिला। खासकर नियाग्रा
प्रपात के आसपास।
राजस्थान, महाराष्ट्र और अन्य
दक्षिण राज्यों की तुलना में मेरा अपना मध्यप्रदेश मुझे इस मामले में थोड़ा उदासीन
दिखाई दिया है। अन्य राज्य भी ज्यादातर धार्मिक और प्राकृतिक सौंदर्य की वजह से
पर्यटको को थोड़ा आकर्षित करते हैं। जबकि मात्र नियाग्रा प्रपात की वजह से विभिन्न
रुचि के पर्यटकों के लिए इधर थोड़ी थोड़ी दूरी पर कुछ ऐसे विशेष स्थल विकसित किये गए
हैं जहां जाकर और समय व्यतीत कर अपनी तरह से छुट्टियां व्यतीत कर सकता है। मसलन
बड़े, लम्बे पार्कों में कैम्पिंग, फिशिंग, नौकायन, साइकिल ट्रेक्स के अलावा 'फ्लॉवर क्लॉक', 'नियाग्रा लेक विलेज','एडवेंचर स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन', 'बर्ड किंगडम',शौकीनों के लिए 'केसीनोस' 'जिपलाइन राइड थ्रिल', ‘व्यू फ्रॉम हेलिकॉप्टर', 'फन एन्ड फ़ूड' 'स्काई लॉन टावर' आदि जैसी कई चीजों और पॉइंट्स ने नियाग्रा फाल्स
का आकर्षण और बढ़ा दिया है।
इस क्षेत्र में अंगूर की खेती बहुत होती है।
महाराष्ट्र के पंचगनी(महाबलेश्वर) में जिसप्रकार कई तरह के शर्बत निशुल्क चखने के
लिए उपलब्ध करवाए जाते हैं। उसी तरह यहाँ वाइनरिस में यह सुविधा वाइन प्रेमियों को
उपलब्ध हो जाती है।
केवल एक ख़ास आकर्षण के केंद्र को बहुविध गतिविधियों से जोडकर उसे व्यापकता देने के लिए मुझे 'नियाग्रा प्रपात' पर्यटन स्थल थोड़ा विशिष्ठ लगा।
केवल एक ख़ास आकर्षण के केंद्र को बहुविध गतिविधियों से जोडकर उसे व्यापकता देने के लिए मुझे 'नियाग्रा प्रपात' पर्यटन स्थल थोड़ा विशिष्ठ लगा।
हम लोगों ने भी अपने सीमित समय में अधिक से अधिक
मजा लेने की कोशिश की। नियाग्रा लेक विलेज भी गए। फ्लॉवर क्लॉक के सामने तस्वीरें
भी खिंचवाईं। विशाल बोट से प्रपात की धारा के करीब पहुंचने का रोमांच भी खूब अनुभव
किया। बच्चों ने जीपलाइन राइड जैसे एडवेंचर के रोमांच का मजा लिया।
रात को रोशनी में नहाए प्रपात और आसपास का
खूबसूरत नजारा देखने के बाद गो बस से 18 अगस्त को तड़के 3 बजे के आसपास हम लोग घर लौट आए।
अक्टूबर के बाद सर्दियों में यह ख़ूबसूरत और विशाल
प्रपात अपना नया रूप धारण करने लगता है। बर्फ जमें प्रपात को निहारना हमें किसी और
ही दुनिया में ले जाता है। भविष्य में इस नज़ारे को भी देखने की आकांक्षा के साथ ‘नियाग्रा
नदी’ और विश्व के इस सुन्दरतम ‘प्रपात’ को ‘गुड बाय’ कहकर विदा ली।
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