यात्रा डायरी
कनाडा से चिट्ठी : चार
18
गो ट्रेन से टोरंटो
कनाडा में जून माह का समापन इस मायने में
अधिक उत्साहवर्धक हो गया क्योंकि इसबार शनिवार,रविवार अवकाश के अलावा 1 जुलाई सोमवार को 'कनाडा डे' जैसे राष्ट्रीय दिन का खास अवसर भी साथ
साथ आ गया। फुल एन्जॉयमेंट के लिए सुकून भरा लॉन्ग वीकेंड। कनाडा के लिए 'समर' सीजन वैसे ही लोगों में उत्सव के रंग भर देता
है।
'कनाडा डे' का
यहां उतना ही महत्व है जैसा भारत में '26 जनवरी अथवा 15
अगस्त' का होता है। 1 जुलाई
1867 को कनाडा राष्ट्र की स्थापना (जन्म) संविधान अधिनियम के
तहत हुई थी। इस राष्ट्रीय दिन फेडरल अनिवार्य अवकाश घोषित रहता है। इस अवसर पर
अनेक कार्यक्रमों के अलावा आतिशबाजी आदि भी की जाती है।
बहरहाल, लांग वीकेंड पर सैर सपाटे का कार्यक्रम तो बनना ही था। शनिवार को टोरंटों
घूमने का तय किया गया। इस बार रेल के सफर का आनन्द उठाने के लिए न्यूमार्केट
स्टेशन से यूनियन स्टेशन टोरंटो के लिए आने जाने का टिकट निकाला।
टिकिट निकालने का अर्थ यहाँ सचमुच निकालना
ही था। अक्ष 12 वर्ष से कम है, उसका किराया सरकार नहीं लेती। बेटे का प्रीपेड कार्ड है,बस स्वाइप करना पड़ता है,पैसे कट जाते हैं। बहू रेलवे
में अंशकालीन सेवाएं देती है तो उन्हें फ्री पास(कार्ड) प्राप्त है। हालांकि हम
दोनों वर्किंग वीक डेज़ में काउंटर से टिकिट खरीद सकते हैं लेकिन केश लेस को बढ़ावा
दिया जा रहा हैं यहां भी। बेटा वेडिंग मशीन से क्रेडिट कार्ड से दो रिटर्न टिकिट
(डे पास) खरीदता है। टिकिट मशीन से बाहर निकल आते हैं। शनिवार रविवार को काउंटर
बन्द रहते हैं। ट्रेन में भीड़ भी नहीं होती। कुछ ट्रेनों के फेरे भी कम और छोटे कर
दिए जाते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि यही टिकिट 'गो ट्रांजिट' की बसों में भी स्वीकार्य होता है ,यदि आवश्यक हुआ तो अगले स्टेशन के लिए बस मुहैय्या करा दी जाती है।
दरअसल गो ट्रांसिट सिस्टम क्षेत्रीय
सेवाएं हैं जो ओंटारियो राज्य के ट्रांसपोर्ट विभाग द्वारा संचालित की जाती हैं।
हरे और सफेद रंग की डीजल से चलने वाली डबल डेकर आरामदायक वाताकुलित ट्रेनें
ओंटारियो रीजन में चलती हैं। न्यूमार्केट, बैरी से यूनियन स्टेशन लाइन के लगभग बीच में पड़ता है।
दिव्यांगों का डिब्बा एक विशेष स्थान पर ही आकर खड़ा होता है जहां प्लेटफॉर्म थोड़ा ऊंचा बना होता है। बुजुर्गों और दिव्यांगों तथा सर्दी,बर्फबारी से बचने के लिए शीशे की दीवारों वाले कैबिन प्लेटफोर्म पर उपलब्ध रहते हैं। जिनमें रूट चार्ट भी लगा होता है।
नियत समय पर प्रातः 10.40 की ट्रेन में हम बैठ जाते हैं। ऊपरी मंजिल को
प्राथमिकता देते हैं ताकि बाहर के नजारे का हम लुत्फ उठा सकें।
एयर लाइंस की तरह ही ट्रेन के भीतर
उद्घोषणाएं होती रहती हैं। मसलन दरवाजे बंद हो रहे हैं, अगला स्टेशन कौनसा आएगा। ट्रेन एम्बेसेडर ( अपने यहां
गार्ड,टी सी आदि) स्वयं अनाउंस करता है। वक्त बेवक्त
प्राथमिक चिकित्सा भी देता है,यात्रियों की अन्य सहायता भी
करता है। यह भी बताता है उद्घोषणा में कि वह किस डिब्बे/कोच में बैठा हुआ है आदि
आदि। आपातकालीन चैन की जगह एक पीली पट्टी लगी होती है उसे दबाकर सूचना दी जा सकती
है। हाँ, यह पीली पट्टी गो बस में भी लगी होती है,मगर यह जानकर आप हंस सकते है कि उसका स्थान खिड़की के किनारे उस जगह होता
है जहां हम भारतीय ऊंघते हुए सिर टकराते रहते हैं।
सुंदर दृश्यों को निहारते हुए टोरंटो की
पहली रेल यात्रा शुरू हो गई। महात्मा गांधी ने कहा था कि असली भारत को जानना है तो
रेलयात्रा कीजिये। कनाडा के संदर्भ में इसी तरह कहा जा सकता है प्राकृतिक सौंदर्य, शिष्टाचार और नागरिक दायित्व और नियमों को पालन होते
देखना है तो कनाडा में गो ट्रांसिट से यात्रा कीजिये। फेडरल कनाडा गोवर्न्मेंट
द्वारा संचालित VIA विया रेल का अभी अनुभव नहीं लिया। इन
रेलों से कनाडा के हर हिस्से की यात्रा की जा सकती है।
ट्रेन एम्बेसेडर ने घोषणा की ' अवर नेक्स्ट स्टेशन इस.....'
आगे माइक पर जवाब किसी बच्चे ने दिया-'यूनियन'।
इतना दिलचस्प,हल्का फुल्का प्रशासनिक आनन्द!! यद्यपि बाद में एम्बेसेडर ने भी अधिकृत घोषणा की। आज शनिवार जो था...सभी उत्सवी मूड में जो थे....
आगे माइक पर जवाब किसी बच्चे ने दिया-'यूनियन'।
इतना दिलचस्प,हल्का फुल्का प्रशासनिक आनन्द!! यद्यपि बाद में एम्बेसेडर ने भी अधिकृत घोषणा की। आज शनिवार जो था...सभी उत्सवी मूड में जो थे....
करीब एक घण्टे के सफर के बाद यूनियन
टोरंटो के अंडर ग्राउंड प्लेटफॉर्म पर हम लोग उतर गए।
सुगम अंडर ग्राउंड पाथ से होते हुए हम ऊपर
आये जहां एक बड़े स्काय वे से होते हुए थोड़ी ही देर में हम लोग पैदल ही चलकर विश्व
प्रसिद्ध सीएन टॉवर की तलहटी में उस स्थान के समक्ष खड़े थे,जहां से टॉवर के शिखर की ओर देखने पर हमारी टोपी नीचे
गिर सकती है। फोटो की फ्रेम में हमारा चेहरा नही आ सकता। निकट ही विख्यात रिप्लीज
एक्वेरियम था। पहले हमने उसका मजा लेना तय किया....
19
मन के भीतर मुस्कुराईं इंद्रधनुषी मछलियाँ
मन के भीतर मुस्कुराईं इंद्रधनुषी मछलियाँ
ख्यात सीएन टॉवर से ठीक लगा
हुआ आकर्षण का प्रमुख केंद्र है रोमांचक और तुलनात्मक रूप से बिल्कुल नया नया
निर्मित 'रिप्लीज
इन्टरटेंटमेंट' कंपनी द्वारा संचालित पब्लिक 'रिप्लीज़ एक्वेरियम'।
वर्ष 2013 के अक्टूबर माह की 16 तारीख को नागरिकों, पर्यटकों के लिए शुरू हुए इस
मछलीघर की विशालता का अनुमान इस बात से ही लगाया जा सकता है कि यहां बनाये गए
विशाल जलीय शोकेसों में कुल 12500 वर्ग मीटर आयतन में 57
लाख लीटर या 15 लाख यू एस गैलन पानी मे लगभग 16000
जल जीव अपनी उपस्थिति और जलक्रीड़ा से दर्शकों का मन मोहते रहते हैं।
पोता अक्ष पहले दो बार
स्कूल के ग्रुप और माता पिता के साथ आकर इसका मजा उठा चुका था। लांग वीकेंड और
सर्व प्रिय मौसम की वजह से यहां बहुत अधिक भीड भाड़ थी और टिकिट हेतु लंबी कतारें
लगी थी। टिकिट मशीन द्वारा क्रेडिट कार्ड से या काउंटर से भी खरीदा जा सकता था।
कोई 20 मिनट
प्रतीक्षा के बाद टिकिट मिल गए।इस बीच हम लोग रिसेप्शन हॉल की बेंच पर दर्शकों का
जायजा लेते रहे।
स्थानीय नागरिकों की
अपेक्षा अन्य देशों से आये पर्यटक बहुत ज्यादा थे। खासकर भारतीय और हमारे पड़ोसी
देशों के हमारे भाई बहनों को देख परदेस में अपनों के मिल जाने जैसा ही लगता रहा। तमिल,तेलगु,पंजाबी,मराठी,हिंदी,गुजराती के जाने
पहचाने वाक्य कई बार सुनाई दिए तो दोनों और सहज मुस्कुराहटें शोकेसों के बाहर भी
तैरने लगीं।
बेबी वाकर,व्हील चेयर्स और इलेक्ट्रॉनिक चेयर्स
पर भी अनेक बच्चे, वृद्ध और दिव्यांग मछलीघर का आनन्द उठाते
दिखे।
वस्तुतः एक्वेरियम का असली
मजा तो साक्षात जलजीवों को विचरण करते देखकर ही लिया जा सकता है। शब्दों और कैमरों
से चित्र खींचना किसी श्रेष्ठ रचनाकार या प्रतिभाशाली फोटोग्राफर के लिए भी बड़ा
मुश्किल ही होगा।
लगभग 3 घंटे हम इस विशाल एक्वेरियम में
दुनिया भर की विशाल,खूबसूरत और विविध रंगी,भिन्न भिन्न बनावट ,प्रकृति की छोटी बड़ी मछलियों को
देखकर प्रफुल्लित,अचम्भित होते रहे। कहीं खुद चलकर गए,
कुछ जगह फ्लोर चलता रहा। बच्चे एक्वेरियम में घुसकर उसका हिस्सा भी
बने। कुछ जलजीवों को छूकर भी देख सके। कुछ मॉडलों से जल खेल भी खेलते दिखे छोटे
बच्चे वहां।
यह सब निहारना बहुत रोमांचक
था। मछलीघर के वाटर सप्लाई और उसमें प्रयुक्त प्रणाली को भी बहुत रंगीन और खूबसूरत
ढंग से प्रदर्शित किया गया था। वेस्ट से बेस्ट बनाने और प्लास्टिक बोतलों के कूढ़े
से बचने को प्रेरित करते कुछ मॉडल भी ध्यान खींचते हैं वहां।
मोबाइल से कुछ तस्वीरें लीं
और कुछ वीडियो भी बनाये।
तन मन में आनन्द का इंद्रधनुष खिलाते इन प्यारे जलजीवों और रंगबिरंगी मछलियों को अलविदा कहा और एक्वेरियम के बाहर आ गये.....! नीले आसमान में सफेद बादलों के कुछ टुकड़े मछलियों की शक्ल लिए विचरण करते नजर आए....
तन मन में आनन्द का इंद्रधनुष खिलाते इन प्यारे जलजीवों और रंगबिरंगी मछलियों को अलविदा कहा और एक्वेरियम के बाहर आ गये.....! नीले आसमान में सफेद बादलों के कुछ टुकड़े मछलियों की शक्ल लिए विचरण करते नजर आए....
अब हमें सीएन टॉवर की
भव्यता और हार्बर फ्रंट सेंटर झील किनारे प्रकृति और ज्ञान,विज्ञान के कुछ और नजारों का मजा लेना
था....।
20
दिलकश हार्बर फ्रंट और टोरंटो का चाँद
दिलकश हार्बर फ्रंट और टोरंटो का चाँद
हम लोगों को हार्बर फ्रंट सेंटर और
ओंटारियो लेक ले जाने,घुमाने में बेटे अग्रज और
अभिरुचि का बहुत मन था। दरअसल, यही वह इलाका था जहां ये लोग
भारत से आकर पहली बार ठहरे थे। किराये का छोटा फ्लेट भी यहीं था और अक्ष का पहला
स्कूल,अग्रज का दफ्तर भी यहां से 10 मिनट
की पद यात्रा के बाद आ जाता था। कनाडा की कम्युनिटी से जुड़ने और समझने का अवसर इन
लोगों को यहीं से मिला। हार्बर फ्रंट सेंटर की सामाजिक गतिविधियों में भी इन्हें
सेवा करने का मौका मिलता रहा।
सीएन टॉवर को निकट से देखने के बाद हम लोग
पैदल ही हार्बर फ्रंट जा सकते थे लेकिन हमने टैक्सी से पुराने घर और अक्ष के स्कूल
के नजदीक पहुंचने का निर्णय लिया। वहां से हम पूरे लेक फ्रंट का चलते हुए इत्मीनान
से आनन्द ले सकते थे।
लेक फ्रंट से लगा हुआ ही अक्ष का स्कूल
बाहर से देखा। इसी के थोड़ा आगे सामने की ओर बहुमंजिली इमारत की पांचवी मंजिल पर
इनका पहला किराये का फ्लैट हुआ करता था। हमने इन लोगों की आंखों में स्मृति की
खुशी साफ महसूस की। इधर ये लोग कोई दो साल रहे थे। बिल्डिंग के टॉप से सीएन टॉवर
और फ्लेट से खूबसूरत झील दिखाई देती थी।
नजदीक की बजाए सीएन टॉवर दूर से हर कोण से
बहुत सुंदर दिखाई देता है। लगभग 553 मीटर (1465 फिट) ऊंची यह इमारत रेलवे की भूमि पर फरवरी 1973 में
बनना शुरू हुई थी। सं 1976 में जब ये बनकर तैयार हुई तब
दुनिया का सबसे ऊंचा फ्री स्टैंडिंग स्ट्रक्चर था। नाम में सीएन से तात्पर्य यहां 'केनेडियन नेशनल' नामक उस रेल्वे कम्पनी से है जिसने
प्रारंभिक रूप से इसका निर्माण किया।
हार्बर लेक फ्रंट बहुत खूबसूरत जीवंत
दृश्यों को प्रस्तुत कर मन को आनन्दित कर देता है। एक दृश्य में विशाल गहरी नीली
झील के किनारों पर भिन्न भिन्न प्रकार की छोटी बड़ी सुंदर विशाल बोटें, स्टीमर आदि बंधे थे। दूसरे दृश्य में वाटर टैक्सीज,
बोट्स, पतवार वाली नांवें पर्यटकों को झील की
सैर करवा रहीं थीं। दूर कहीं सैकड़ों यात्रियों को बैठाए बहुमंजिली फैरीज भी नजर
आईं। किनारों पर लकड़ी के फट्टों से निर्मित खूबसूरत
स्टैंड्स पर पर्यटक इन दिलकश नजारों पर मुग्ध होते दिखे। पानी में विचरती बतखें
भी।
झील के किनारे पर यहां एक हवाई अड्डा भी
है, पल पल कई छोटे बड़े विमान झील और आकाश की पृष्ठभूमि में
उतरते और उड़ान भरते नजर आते हैं। ऐसा लगता है जैसे वे पानी पर ही लेंड कर रहे हों।
यह दृश्य उस वक्त और भी बहुत खूबसूरत हो जाता है जब पानी पर पाल वाली बड़ी नाव,
उतरता हवाई जहाज, रेसिंग बोट और आसमान में कोई
हेलीकॉप्टर अपने पंख फड़फड़ाता गुजरने लगता है। जैसे किसी पेंटिंग या कैलेंडर के
पन्ने पर कोई मनमोहक तस्वीर छपी हो।
एक किनारे पर बड़ा पतवार बोट ठीक उसी तरह
रखा/बँधा है जैसे हमारे इधर पुरानी चार पहियों वाली बग्घी सजी धजी खड़ी होती है। यह
बोट शादी,पार्टियों और उत्सवों के
लिए किराये पर उपलब्ध कराया जाता है। बाकायदा इसके पास इस संदर्भ में सूचना पट लगा
है। हमने इसके साथ चित्र खिंचवाए। बेशक पीछे सीएन टॉवर अपनी शान में इठला रहा था।
कनाडा का यह गौरव संगीत पार्क हो , बीच हो या बादल छाए हों,
चांद की तरह हमारे साथ चलता है हार्बर फ्रंट के आकाश में।
इस दौरान हमने हार्बर फ्रंट सेंटर की
गतिविधियों को देखा। डीजे ,रेस्टोरेंट,खरीददारी के अलावा लोग यहां सेमिनारों में भी व्यस्त थे। सामाजिक
गतिविधियों हो रहीं थी जिनमे स्कूली बच्चे ब्लू टी शर्ट पहने सामाजिक सेवा में
वालेंटियर की भूमिका में थे। इस स्वैच्छिक सेवा के प्रमाण पत्र का उनके कैरियर में
बड़ा योगदान होता है।
स्किल डेवलपमेंट के भी कुछ वर्कशॉप चल रहे
थे जहां भिन्न कमरों में क्राफ्ट,कारपेंटरी,ग्लास वर्क, क्लॉथ पेंटिंग,लोहारी(मेटल
वर्क) आदि के निरंतर प्रशिक्षण और अभ्यास में कुछ युवा व्यस्त दिखे। एक थियेटर
कक्ष के अलावा अन्य कई रचनात्मक गतिविधियों के लिए भी यहां साधन और व्यवस्थाएं
देखने को मिली। अच्छा लगा मन को।
लंच हमने इधर एक 'इंडियन रेस्टोरेंट' पर किया। नान,रुमाली रोटी,मलाई कोफ्ता और बटर पनीर बढ़िया था।
रेस्टोरेंट एक भारतीय मूल की युवती चला रही थी।
शाम 7 बजे के आसपास स्ट्रीट कार(ट्रॉम) से
यूनियन स्टेशन आये। गो ट्रेन शनिवार होने से न्यूमार्केट तक न जाकर ऑरोरा स्टेशन
तक जाती थी। वहां से 'गो बस' ने हमारा साथ निभाया। रात 9 बजे न्यूमार्केट स्टेशन
से अपनी कार उठाकर हम घर लौट आए।
इस तरह एक और खूबसूरत दिन हमारी स्मृतियों
की आलमारी में सहेज लिया गया।
लांग वीकेंड का अंतिम दिन 1 जुलाई हमारे लिए वह एक महत्वपूर्ण दिन
था जब हम किसी अन्य राष्ट्र के 152 वें स्थापना दिवस के मौके
पर पहली बार भारत से बाहर की भूमि पर जीवन का आनन्द उठा रहे थे। यहां वर्ष 2017
में मनाए गए 150 वें भव्य उत्सव के कुछ चिन्ह
अब भी जगह जगह नजर आए।
'कनाडा डे'
हर साल 1 जुलाई को राष्ट्रीय दिन और देश की
जन्मगाँठ उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन राष्ट्रीय अवकाश होता है। कुछ
जरूरी सेवाओं को छोड़कर स्कूल से लेकर सारे दफ्तरों और संस्थानों मे छुट्टी रहती
है।
सामान्यतौर पर इस ख़ास दिन
आकर्षक परेड्स और आतिशबाजी के छोटे बड़े आयोजन होते हैं जिनमें नागरिकों की
पारिवारिक भागीदारी भी होती है। सुबह से लेकर रात तक मनोरंजन कार्यक्रम, मेलों के आयोजन में फ़ूड स्टाल्स,
बैंड,संगीत प्रस्तुतियां, छोटी दुकानें,बच्चों के खेल कूद के अलावा बाइकर्स के
हैरत अंगेज प्रदर्शन होते हैं।
लोग वैसे तो अपने घरों पर
पूरे साल कनाडा का मेपल की लाल पत्ती वाला ध्वज लगाए रहते हैं लेकिन इस दिन छोटे,बड़े झंडों को घर द्वार और वाहनों पर भी सजाया
जाता है। लाल और सफेद रंगों के परिधानों को विशेषरूप से पहना जाता है। कुछ बच्चे
और युवा और सोशल वर्कर अपनी हैट्स और बालों आदि में भी लाल सफेद झंडों को आकर्षक
रूप से लगा लेते हैं। हम भी कुछ हद तक लाल, सफेद परिधान धारण
करके कनाडा की खुशियों में शामिल हुए। बच्चों ने घर और कार पर भी कनाडा का झंडा
लगाया।
न्यूमार्केट शहर में भी इस
खास दिन के कई कार्यक्रम तय थे। इन आयोजनों का अवलोकन करने का उत्साह और जिज्ञासा
प्रबल थी। हालांकि इस बार प्रातः कालीन परेड प्रस्तावित नही थी किन्तु मेला
क्षेत्र में कारों का आना जाना प्रतिबंधित किया हुआ था। कुछ निश्चित स्थानों पर
पार्किंग के बाद आगे लोफ्लोवर बसों से निशुल्क यात्रा की व्यवस्था की गई थीं।
सुबह 11 से 4 बजे के बीच
मेन स्ट्रीट स्थित कम्युनिटी सेंटर और रिवर वाक कॉमन्स पर मेले में बैंड, संगीत, फन,फ़ूड, गेम्स और अन्य मनोरंजक गतिविधियों के अलावा छोटे छोटे स्टाल्स हमारे यहां
होने वाले आनन्द मेले या हाट बाजार की तर्ज पर ही लोगों को खूब लुभा रहे थे।
बाइकर्स के रोमांचक प्रदर्शन का भी हमने भी खूब मजा लिया।
शाम को घर के नजदीक ही
जॉर्ज रिचर्डसन पार्क में शाम सात बजे से रात्रि साढ़े दस बजे तक न्यूमार्केट
सिटीजन बैंड की प्रस्तुतियों और आतिशबाजी को देखने के लिए जैसे पूरा शहर ही उमड़
आया। यहां कुछ दशहरा उत्सव जैसा लोगों का मेला लगा था। बच्चों से लेकर वृद्धों तक
में असीम उत्साह नजर आ रहा था। सब लोग अपने साथ फोल्डिंग चेयर्स, दरियां आदि भी साथ लाये थे। कुछ लोग
नाश्ता,भोजन भी वहीं करते दिखे।
संगीत,बैंड की प्रस्तुतियों के बाद ठीक 10
बजकर 10 मिनट पर शानदार और नयनाभिराम आतिशबाजी
से आसमान में बहुरंगी सितारे बिखर गए। अद्भुत नजारा था। हमने इस तरह व्यवस्थित और
लंबी आतिशबाजी सचमुच अभी तक नहीं देखी थी।
'कनाडा डे'
उत्सव के इस मनोहारी समापन के बाद घर लौटने पर कुछ देर पटाखों की
आवाजें उसी तरह आती रहीं जैसे दीपावली की रात थोड़ी थोड़ी देर में सुनाई देती रहती
हैं.....
No comments:
Post a Comment