Monday, 15 July 2019

यात्रा डायरी : कनाडा से चिट्ठी : छह


यात्रा डायरी 
कनाडा से चिट्ठी : छह

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हम होंगे कामयाब एक दिन


आज 11 जुलाई को जब मैं कनाडा में बेटे के घर के बैकयार्ड में बैठा गुनगुनी धूप का मजा ले रहा हूँ दुनिया भर के कई देश 'विश्व जनसंख्या दिवस' मना रहे हैं। भारत में इस वक्त  यह दिन समाप्ति की ओर होगा, इधर कनाडा में दिन के ढाई बजने को आए हैं।

जनसंख्या घड़ी के मुताबिक कनाडा की आबादी आज 3 करोड़ 72 लाख 87 हजार के लगभग है। जोकि दुनिया की सम्पूर्ण आबादी का केवल 0.48% बनता है।जनसंख्या रैंकिंग में अन्य देशों की तुलना में उसका क्रम 38 वें स्थान पर आता है।उपलब्ध जमीन के आधार पर यहां प्रति वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में मात्र 4 व्यक्तियों का घनत्व आंकड़ा बैठता है।

यहाँ की आबादी का 82% हिस्सा शहरों में निवास करता है तथा median age लगभग 40.7 वर्ष है याने 50 प्रतिशत आबादी में लोग लगभग 41 वर्ष के नीचे की आयु के शामिल हैं। स्पष्ट है प्रौढ़ों और बुजुर्गों की तादाद यहां बहुत अधिक है। लोग लम्बा जीवन जीते हैं। स्वास्थ्य समस्याएं कम और चिकित्सा या तो बेहतर है या उसकी कम आवश्यकता पड़ती है या फिर लोग अपने स्वास्थ्य पर पर्याप्त ध्यान दे पाते हैं। दूसरी तरफ आंकड़ों के विश्लेषण से जन्म दर और यहां बाहर से आकर बसने वाले युवाओं की संख्या भी बहुत कम नहीं कही जा सकती।

दरअसल विश्व जनसंख्या दिवस को प्रति वर्ष मनाने के पीछे मुख्य उद्देश्य यह है कि देश के लोग और सरकारें जनसंख्या से जुड़े मसलों को समझ सकें और अपने लिए विकास की योजनाओं पर पर्याप्त ध्यान देकर उनके कार्यान्वयन को सुगम और प्रभावकारी बना सकें।
आज की तारीख में 131 करोड़ आबादी वाले हमारे देश के संदर्भ में यह जान लेना भी बड़ा दिलचस्प है कि एक अध्ययन के मुताबिक जनसंख्या वृद्धि की यही दर रही तो वर्ष 2100 तक भारत चीन से भी आगे बढ़कर दुनिया का सबसे बड़ी आबादी वाला मुल्क बन जायेगा।
भारत के पास दुनिया के कुल भू क्षेत्र का मात्र 2% ही है लेकिन जनसंख्या वृद्धि में उसका योगदान बहुत बड़ा अर्थात लगभग 16 % होता है और उसकी आबादी के घनत्व की बात तो निराली ही है। लगभग 35% आबादी तो केवल बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र राज्य में ही निवास करती हैं।
देखा जाए तो हमारी ज्यादातर आर्थिक,सामाजिक समस्याओं की जड़ में विशाल जनसंख्या का भी एक बड़ा कारण कहा जा सकता है।
इस सबके बावजूद आजादी के 72 सालों में हम अपनी समस्याओं से जूझते हुए यदि सचमुच मजबूत हुए हैं, विकसित देश में बदलने के अपने संघर्ष में लगातार संलग्न हैं तो यह बड़ी बात है।
राजनीतिक नारों और आश्वासनों से इतर शायद हम लोग ही होंगे जो भारत को 'विकसित देश' बनाने का अपना सपना पूरा कर सकते हैं, बशर्ते निरर्थक जयकारों से ऊपर उठकर वास्तविकता को स्वीकारते हुए कोई प्रभावी कदम उठा सकें।

तब तक यह गीत तो गुनगुनाया ही जा सकता है.....हम होंगे कामयाब एक दिन...!


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फिर कब मिलोगे...ब्लू माउंटेन 

न्यूमार्केट में शनिवार को मौसम खुशनुमा था। तापमान 15 से 26 के बीच रहना था। लेकिन दोपहर होते होते तेज बारिश हो गई। सप्ताहांत में पहले विश्व प्रसिद्ध और दुनिया के सबसे बड़े जलप्रपात का लुत्फ उठाने का कार्यक्रम बन रहा था लेकिन फिर किन्ही कारणों से अगले किसी सप्ताहांत तक के लिए स्थगित कर दिया।

दूसरा विकल्प था खूबसूरत 'ब्लू माउंटेन विलेज' की सैर करना। वहां के मौसम का हाल गूगल पर सर्च किया तो पाया कि रविवार(15 जुलाई) को तापमान 15 से 21 तक ही रहने वाला था और धूप भी खिली रहने की संभावना थी। याने सोने में सुहागा।
ब्लू माउंटेन विलेज घर से थोड़ा नजदीक भी था। लगभग 200 किलो मीटर की दूरी दो ढाई घण्टों की ड्राइव में अधिक थकाने वाली भी नहीं थी। सोमवार को बच्चों को फिर अपने कामकाज में भी लगना था।

आखिर रविवार को सुबह कोई 10 बजे नाश्ता करके हम लोग घर से निकल गए। हाइवे को एवॉइड करते हुए हमारी कार क्षेत्रीय मार्गो से जब आगे बढ़ने लगी तो हमारे सामने सिवाय प्रकृति के खूबसूरत नजारों को निहारने और प्रफुल्लित होने के अतिरिक्त और क्या हो सकता था।

इस बार हमने रास्ते में फसलों से लहलहाते कई खेत भी देखे। सरसों के फूलों सी पीली चादर खेतों पर लहराती देखकर पचपहाड़ के अपने खेत याद आ गए। घास के रोल किये बंडल भी दिखाई दिए जो अब तक कुछ भारतीय फिल्मों के उन दृश्यों में देखे थे जिनमें विदेशी लोकेशन पर कुछ गीत फिल्माए जाते रहे हैं।

बेटा, बहू,पोता इस पर्यटन स्थल पर दूसरी बार आये थे। पहले विंटर में और अब समर में। पिछली बार बर्फीले मौसम में झील के रास्ते वे विलेज नहीं पहुंचे थे। इस बार जीपीएस ने हमें वृहद झील के समांतर सड़क की सैर करा दी। झील के किनारे करीब 11 किलोमीटर हम आगे निकल गए।दरअसल जीपीएस में पोते ने ब्लू माउंटेन डेस्टिनेशन लगा दिया था,विलेज लिखना ही भूल गया इससे खूबसूरत झील के दीदार भी हो गए।इसके किनारे भी अनेक रिसोर्ट और बीच नजर आए। लौटते में इधर आने का तय करके जीपीएस ठीक किया। और करीब 1 बजे के आसपास ब्लू माउंटेन के तीसरे पार्किंग एरिया में थोड़ी दूरी पर दो तीन चक्कर में कार के लिए स्पेस मिल गया।

दरअसल, ब्लू माउंटेन का असली मजा विंटर याने शीतकाल में हिमपात के बाद बर्फ जमने के बाद ही अधिक आता है। पहाड़ियों की ढलान पर जमी बर्फ पर सैलानी और खिलाड़ी विंटर स्पोर्ट्स का मजा खूब लेते हैं। स्कीइंग के लिए पहाड़ियों के टॉप पर तार पर चलने वाली ट्रालियों (रोप वे) द्वारा ऊपर पहुंच कर स्कीइंग करते हैं। रोमांच और जोखिम से भरी स्कीइंग का आनन्द लेने के लिए न सिर्फ खिलाड़ी बल्कि दर्शक भी खूब यहां जुटते हैं तथा ब्लू माउंटेन विलेज के रिसॉर्ट्स में रहते हैं।

समर में भी इसका विकल्प यहां मौजूद है। समर में साइकिलिस्ट अपनी साइकिलें ऊपर ले जाते हैं और उन्हें विशिष्ट और रोमांचपूर्ण रास्तों से नीचे तक चलाकर लाते हैं। बच्चों के लिए भी ऊपर से नीचे तक घुमावदार फिसलन रास्ता (फिसल पट्टी) बना है जिनपर ऊपर से बच्चे,युवा आदि गाड़ियों ( Ridge Runner Mountain Coaster) पर फिसलते हुए रोमांच का अनुभव करते हैं। छोटे बच्चों और किड्स के लिए भी मनोरंजक खेलों और बोटिंग आदि की व्यवस्थाएं हैं। पूरे परिवार का मन रम जाता है यहां।

इन्ही रिसॉर्ट्स के बीच की गलियों में छोटा सा खूबसूरत बाजार है जिसमें खाने,पीने, प्रसाधन, गारमेंट्स आदि से लेकर मनोरंजन के साधन और अन्य स्टोर्स पर्यटकों को  आकर्षित  करने के  लिए सजे रहते हैं। चार घंटों से लेकर चार दिन और चार रातों तक इस पर्यटन गांव का मजा लिया जा सकता है। हमने चार घण्टों में आनन्द का घनत्व बढ़ाने का प्रयास किया।

कई देशों के ध्वजों के साथ यहां हमारे तिरंगे को देखकर मन में भी 'जय है' जैसा कुछ अतिरिक्त ध्वनित हुआ।

अब हमें लौटते हुए 'वसागा बीच' पर कुछ समय लहरों से खेलना था। ब्लू माउंटेन को हमने अलविदा नही कहा बल्कि 'फिर आते है' कहकर विदा ली। कार में किशोर दा और लता दीदी मानो हमारे मनोभावों को ही गाकर अभिव्यक्त कर रहे थे- अच्छा तो हम चलते हैं... फिर कब मिलोगे...?'


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ताजगी से लबालब शाम 


दरअसल, 'वसागा बीच' ओंटारियो राज्य की जॉर्जियन खाड़ी के दक्षिण छोर पर बसा लगभग 25 हजार आबादी का एक खूबसूरत कनेडियन शहर है। नोत्तावासागा खाड़ी पर यह एक लंबे रेतीले बीच के रूप में जाना जाता है।नियाग्रा के ढलान वाले बीहड़ों के बीच नोटावासागा नदी के डोंगी मार्ग के रूप में भी इसका महत्व है। नदी के मुहाने पर स्थित इस कस्बे का अपना ऐतिहासिक महत्व भी है। प्रोविंशियल पार्क,साइकिल ट्रैक्स वाले इस कस्बे में लेक के किनारे कोई 33 किलोमीटर तक 8 अलग अलग बीच एरिया हैं। हम लोग ब्लू माउन्टेनविलेज से करीब एक घंटे के ड्राइव के बाद यहाँ तीसरे नम्बर के एरिया पर पहुंचे।

कुछ क्षेत्रों में तैरने की अनुमति है। कुछ पर पालतू पेट्स को भी ले जाया जा सकता है। हम लोग जब बीच पर पहुंचे तब शाम के 5 बजने को आये थे। सूर्यास्त 9 बजे के बाद होना था। लोग तैर रहे थे। कुछ बीच पर लगी बैंचों,टेबलों पर अपना ठिया जमाये खान पान का आनन्द ले रहे थे। कुछ बच्चे खूबसूरत पतंगों को आकाश में ऊपर उठाने के प्रयास में थे। कुछ परिवार सीधे रेत पर या दरियां बिछाकर सुस्ताते दिखे।

कार की डिक्की में फोल्डिंग चेयर्स हमारे साथ ही रहती हैं। वहीं रेत पर कुर्सियों पर बैठ कर सूर्यास्त के पूर्व की धूप, विशाल जल राशि में उठती लहरों और पर्यटकों की क्रीड़ाओं का लुत्फ लेते रहे। कहने को भले इसे झील कहें, लेकिन यह फ्रेश वाटर (मीठे पानी) की बड़ी खाड़ी ही थी जिसमें समुद्र की तरह ही विशाल लहरें उठ रहीं थीं।

यहाँ यह जान लेना भी बड़ा दिलचस्प और हतप्रभ कर देने वाला है कि कनाडा में दुनिया की सबसे ज्यादा फ्रेश वाटर झीलें स्थित हैं। कनाडा के नक्शे में तीन वर्ग किलोमीटर से बड़ी झीलों को ही मात्र दर्शाया गया है जिनकी संख्या ही 31752 हो जाती है। इनमें से भी 561 बड़ी झीलें ऐसी हैं जिनका क्षेत्रफल 100 वर्ग किलोमीटर से अधिक है। इस तरह कनाडा के कुल क्षेत्रफल का 9 % हिस्सा झीलों के फ्रेश वाटर से भरा हुआ है। छोटी छोटी हजारों झीलों का तो कोई आधिकारिक रिकॉर्ड ही दर्ज नहीं है। जिस दौर में अधिकांश देशों में ग्लोबल वार्मिंग और भूगर्भीय जल के असीमित दोहन से पीने के पानी का महासंकट आ खड़ा हुआ है, कनाडा के विशाल मीठे और ताजे जल स्रोत शेष दुनिया को आश्वस्त करते हैं।

कनाडा की लबालब झीलों के खूबसूरत नजारे और स्मृतियाँ घर लौटने पर उदास दिनों में भी जीवन में ताजगी लाने का काम करती रहेंगी, इस बात में कोई संदेह नहीं है हमें।



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