Monday, 6 July 2026

प्रतिमा में घोड़े के उठे हुए पैर और यौद्धा की मृत्यु का सच

प्रतिमा में घोड़े के उठे हुए पैर और यौद्धा की मृत्यु का सच

हमारे एक प्रिय यूट्यूबर ने जब वाशिंगटन में एक घुड़सवार योद्धा की मूर्ति चौराहे पर स्थापित देखी तो बताया कि मूर्ति में घोड़े के अगले पैरों को देखकर बताया जा सकता है कि योद्धा की मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई थी। घोड़े के पैरों या टांगों को देखकर सवार योद्धा की मृत्यु के कारणों का पता हो जाना एक बहुत ही दिलचस्प और व्यापक रूप से फैला हुआ भ्रम (अर्बन लेजेंड) है। अक्सर सोशल मीडिया पर या गाइडों द्वारा भी यह बताया जाता है कि किसी घुड़सवार मूर्ति  में घोड़े की टांगों की स्थिति देखकर आप राजा या योद्धा की मौत का कारण जान सकते हैं।

आमतौर पर सोशल मीडिया पर जो कहानी चलती है, उसके अनुसार यदि घोड़े की ​दोनों आगे की टांगें हवा में हों तो योद्धा युद्ध में शहीद हुआ था। ​एक आगे की टांग हवा में हो तो योद्धा की मौत युद्ध में लगे घावों या बीमारी के कारण हुई थी और यदि घोड़े की ​चारों टांगें जमीन पर हों तो यह मान लिया जाता है कि योद्धा की मृत्यु प्राकृतिक कारणों (बुढ़ापे या सामान्य बीमारी) से हुई थी। 

दरअसल सच्चाई यह है कि इतिहास और मूर्तिकला (Sculpture) के विज्ञान में ऐसा कोई सार्वभौमिक (Universal) नियम नहीं है। यह केवल एक लोककथा है। यदि हम दुनिया भर के और भारत के महान राजाओं और योद्धाओं की मूर्तियों का अध्ययन करेंगे, तो यह 'नियम' पूरी तरह टूट जाता है। 

इसके पक्ष में कुछ प्रमुख उदाहरण दिए जा सकते हैं। भारतीय संदर्भ में कहें तो रानी लक्ष्मीबाई युद्ध के मैदान में वीरगति को प्राप्त हुई थीं। लेकिन देश भर में उनकी कई ऐसी मूर्तियां हैं जिनमें घोड़े की चारों टांगें जमीन पर हैं, कुछ में एक टांग हवा में है और कुछ में दो। मूर्तिकार ने इस नियम को नहीं, बल्कि कलात्मक दृश्य को प्राथमिकता दी। इसी तरह  शिवाजी महाराज की मृत्यु बीमारी के कारण रायगढ़ में हुई थी। लेकिन गेटवे ऑफ इंडिया (मुंबई) के पास लगी उनकी प्रसिद्ध मूर्ति में घोड़े की एक टांग हवा में उठाई गई है, जो इस कथित नियम से मेल खाती है, लेकिन कई अन्य जगहों पर उनकी मूर्तियों में घोड़े की दोनों टांगें हवा में दिखाई देती हैं। चेतक पर सवार महाराणा प्रताप की कई मूर्तियां हैं। चेतक ने हल्दीघाटी के युद्ध के बाद अपने प्राण त्यागे थे और महाराणा प्रताप की मृत्यु बाद में प्राकृतिक कारणों से हुई थी। लेकिन उनकी कई भव्य मूर्तियों में चेतक की दोनों टांगें हवा में दिखाई गई हैं ताकि उनका आक्रामक और वीर रूप प्रदर्शित किया जा सके।

वैश्विक संदर्भ में भी कई ऐसे उदाहरण उपलब्ध हैं जिनमें यह कहानी ठीक नहीं बैठती। नेपोलियन की मृत्यु सेंट हेलेना द्वीप पर बीमारी से हुई थी। लेकिन उनकी सबसे प्रसिद्ध पेंटिंग और मूर्तियों में उनका घोड़ा 'मारेन्गो' अपनी दोनों आगे की टांगें हवा में उठाए हुए बेहद आक्रामक मुद्रा में दिखता है। रोम के इस प्रसिद्ध सम्राट मार्कोस की मूर्ति में घोड़े का एक पैर हवा में है, लेकिन उनकी मृत्यु बीमारी से हुई थी।

अगर यह कोई नियम नहीं है, तो मूर्तिकार घोड़े के पैरों को अलग-अलग मुद्राओं में क्यों बनाते हैं? इसके पीछे मुख्य रूप से दो महत्वपूर्ण कारण होते हैं। पहला कारण शिल्प में ​कलात्मकता और गतिशीलता दर्शाना।  एक योद्धा को पराक्रमी और साहसी दिखाने के लिए घोड़े को दौड़ते हुए या उछलते हुए दिखाना ज्यादा प्रभावी होता है। चारों पैर जमीन पर होने से मूर्ति थोड़ी शांत या स्थिर लगती है, जबकि पैर हवा में होने से उसमें 'एक्शन' और ऊर्जा दिखाई देती है।दूसरा कारण है शिल्प की इंजीनियरिंग और संतुलन, कांसे (Bronze) या पत्थर की भारी मूर्ति बनाते समय संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। अगर घोड़े की दो टांगें हवा में होंगी, तो मूर्ति का पूरा वजन पीछे की दो टांगों और पूंछ पर आ जाता है। मूर्तिकार अपनी तकनीकी सुविधा और वजन के संतुलन के हिसाब से तय करते हैं कि कितनी टांगें जमीन पर रखनी हैं

​गाइडों द्वारा बताई और सोशल मीडिया पर प्रसारित  यह कहानी सुनने में बहुत रोमांचक लगती है और मूर्तियों को देखने का एक नया नजरिया देती है, लेकिन ऐतिहासिक रूप से यह पूरी तरह से एक मिथक  है कि घोड़े की टांगों के हवा में उठने की स्थिति से योद्धा की मृत्यु का अनुमान लगता हो। किसी भी मूर्तिकार या राजा ने इस नियम को अनिवार्य रूप से कभी स्वीकार नहीं किया। मूर्तियां इतिहास को दर्ज करने के साथ-साथ कला का एक बेहतरीन नमूना होती हैं, और उनमें दिखने वाली मुद्राएं इतिहास से ज्यादा मूर्तिकार की कल्पना और कला का हिस्सा होती हैं।


ब्रजेश कानूनगो 


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