स्मृति के एकांत से...
स्वान्तः
सुखाय 33
33
भय के बीच प्रकाशित पहला आलेख :
पोल साहब की आम सभा
आज 25 जून है। एक लेख याद आ
गया। इमरजेंसी के ठीक बाद के चुनाव के दौरान देवास के परिदृश्य में एक दिलचस्प
उम्मीदवार की सभाओं को लेकर एक लेख नईदुनिया अखबार में प्रकाशित हुआ था। मैं लगभग 20
बरस का युवा ही था। मोहल्ले वालों, परिजनों और
कुछ मित्रों ने इतना डराया कि जैसे अब मुझे हथकड़ी लगने ही वाली हो। मैं भी बहुत
डरा हुआ था। बहुत खौफ में थे लोग।
कभी कभी भय का
भी अच्छा परिणाम निकल आता है। इमरजेंसी के डरावने माहौल में लिखे और प्रकाशित उस
लेख के बाद धीरे धीरे व्यंग्य लेखन का वैसा भय जाता रहा।
कुछ मित्रों
का आग्रह है कि उस दिलचस्प प्रसंग की रिपोर्टिंग वाला लेख मैं पुनः पढवाऊं।
आप वह लेख
यहां पढ़ सकते हैं। कुछ लोगों को शायद उन दिनों का स्मरण हो आए। बाद की पीढ़ी को भी
पता चल सकेगा कि चुनावों में ऐसी बेहुदगियाँ भी कभी हुआ करती थीं। जो आज की
बेहुदगियाँ से कुछ कम भी नहीं होती थीं।
मूलतः यहाँ दे
रहा हूं....
ब्रजेश
कानूनगो
सड़क पर से एक
तांगा गुजरता है. लाल और सफेद पट्टी का एक झंडा उस पर लगा है. झंडे पर एक
स्वास्तिक चिन्ह भी नजर आता है. तांगा देवास विधानसभा क्षेत्र के निर्दलीय
प्रत्याशी श्री सुरेश पोल का है. लाउडस्पीकर से आवाज आती है ‘भाइयों और बहनों, आज रात ठीक नौ बजे नयापुरा चौक में एक आम सभा आयोजित की गई है, जिसे संबोधित करेंगे लोकनायक देवासरत्न और लोकप्रिय नेता श्री सुरेश पोल.
तो आज पोल
साहब की आमसभा अपने मोहल्ले में ही है. सर्वदलीय सभा में जब पोल साहब एक बार बोले
तो उसके बाद जनता ने बार-बार उन्हीं की फरमाइश की थी, बाकी उम्मीदवारों को मौका
ही नहीं मिला.
सामने से एक
मोटरसाइकिल गुजरी. चालक के पीछे पाजामा बुशर्ट पहने सिर पर स्वास्तिक टोपी लगाए
हनुमान मंदिर के पुजारी दोनों हाथ जोड़े बैठे थे. यही थे श्री सुरेश पोल देवास
विधानसभा क्षेत्र के उम्मीदवार. बस इसी प्रकार श्री पोल ने अपना प्रचार किया. कोई
भी इन्हें अपनी मोटर साइकिल, स्कूटर या साइकिल पर बैठाकर घुमा सकता है. चाहे घुमाने
वाला व्यक्ति किसी भी दल से संबंधित हो. सभाओं का प्रबंध भी जनता करती है. जिसे
अपने क्षेत्र में इनकी सभा करवानी होती, एक दिन पहले पोल
साहब से बोल दिया जाता. लोग मंच बनाते. स्पीकर वाला माइक की व्यवस्था कर देता.
चौक नयापुरा
में भी एक किराने वाले से चार तेल की बड़ी टंकियां लेकर उन पर लकड़ी का तख्त रख
दिया जाता है. तैयार हो जाता है 5 फुट ऊंचा मंच. माइक लगा दिए जाते हैं. पान वालों, चिवड़ा वालों के ठेले इधर उधर से आकर सभा स्थल के आसपास जमा होने लगते हैं.
तभी दो
व्यक्ति मंच पर आ बैठते हैं. मंच के पीछे से कोई अनाउंस करता है- ‘मुंबई और दिल्ली से हमारे
मुख्य अतिथि पधार चुके हैं, कुछ ही देर बाद हमारी सभा की
कार्यवाही प्रारंभ होगी.’
बर्फ वाला
बर्फ के गोले बनाकर अतिथियों के सामने प्रस्तुत करता है. देखा देखी अन्य ठेले वाले
भी खाद्य सामग्री प्रस्तुत करते हैं. दोनों तथाकथित अतिथि खा-पीकर अपने कमीजों की
बांह से मुंह पूछ लेते हैं.
हमारे पीछे
बहुत भीड़ हो चुकी है और कुछ देर बाद सभा स्थल लोगों से खचाखच भर जाता है. लोकसभा
चुनाव के समय मुख्यमंत्री की सभा में भी इतनी भीड़ नहीं थी मंच के पीछे से घोषणा
होती है- ‘अब आज की कारवाई शुरु होती है’. मंच के पीछे से एक
हाथ उभरता है.. जिसमें दो फूल मालाएं हैं. आमंत्रित मुख्य अतिथि उन्हें लेकर एक
दूसरे के गले में डालते हैं.
दिल्ली से आए
अतिथि माइक पकड़ कर खड़े हो जाते हैं उनकी पतलून की एक मोरी की 4/5 फोल्ड हो रही हैं. शर्ट
की एक बाहं नहीं है. बाल बिखरे हैं. बोलते हैं- ‘भाइयों और
बहनों’, वे अपना भाषण शुरू करते हैं. जनता एकाएक शांत हो
जाती है. उनकी भाषा शैली बहुत ही उत्कृष्ट है परंतु जो वाक्य वे बोलते हैं उसका
कुछ भी अर्थ नहीं निकलता. वाक्यों की रचना ठीक नहीं थी, फिर
भी जनता उनके हावभाव व शैली का आनंद लेती रही. उन्होंने जो भाषण दिया उसमें इन
टुकड़ों की आवृत्ति सबसे ज्यादा बार हुई थी. ‘जनता ने
कांग्रेस को हराया मैं दोनों को हरा दूंगा... क्यों कैसे?... जनता पार्टी चुनाव करा रही है... क्यों कैसे? जयप्रकाश
जी मरने वाले हैं..क्यों कैसे.. इंदिरा गांधी क्या कर रही हैं .. क्यों कैसे?’
और फिर
तालियां ,फिर तालियां और फिर तालियां... तालियां.
अचानक मंच के
पीछे से नारा लगता है ‘लोकनायक देवासरत्न, सुरेश पोल...’ जनता चिल्लाती है ‘जिंदाबाद, जिंदाबाद!’
भीड़ को चीरते
हुए पुलिस कर्मचारी पोल साहब को मंच तक लाते हैं. मंच का वक्ता चुप हो जाता है.
श्री पोल मंच पर चढ़कर जनता का अभिवादन करते हैं. फूल मालाओं से उनका स्वागत किया
जाता है.
‘भाइयों और बहनों’ उनका भाषण शुरु होता है. कुछ देर
पहले का कोलाहल अब नहीं है. ‘आज यह मेरी पांचवी सभा है,
आपकी उपस्थिति देख कर मुझे प्रसन्नता है. किसी की सभा में इतनी
उपस्थिति नहीं होती है, आपका स्नेह देखकर ऐसा लगता है कि मैं
अवश्य जीत जाऊंगा.’
इसी बीच कई
पर्चियाँ पोल साहब के पास पहुंचती हैं, जिनमें उनसे कुछ प्रश्नों के उत्तर
पूछे गए थे. वे सिर्फ एक पत्र पढ़ते हैं- ‘माननीय विधायक
महोदय देवास में कुत्ते बहुत हो गए हैं उनके बारे में आपकी क्या योजना है?’
और मुस्कुराते हुए वे तुरंत बोलते हैं ‘कुत्ता
गाड़ी बनवा देंगे, छोटा सामान उठाने के लिए.’
जनता तालियां
बजाती है. ‘देवासरत्न जिंदाबाद’ का नारा फिर गूंजता है.
‘पोल साहब अपना घोषणापत्र सुनाओ!’ एक आवाज आती है
‘देखिए, वह मैं आपको कई बार सुना चुका हूं. आज
प्रेस में दे दिया है, कल आपको मिल जाएगा.’
फिर भी अपने
भाषण के दौरान वे कुछ बताते गए. दो घंटे तक उनकी सभा चलती रही. कई विचित्र प्रश्न
पूछे गए. उनके उत्तर श्री पोल बड़ी ही रोचकता से देते रहे. अपनी योजनाएं बताते
रहे.
यहां मैं आपको
पोल साहब के उस ऐतिहासिक चुनाव घोषणापत्र के कुछ महत्वपूर्ण सूत्रों से अवगत करा
दूं.
1 देवास माताजी की टेकरी को ऑयल पेंट कराया जाएगा.
2 दोनों तालाबों को स्विमिंग पूल बनाया जाएगा.
3 देवास से नागदा पहाड़ी तक एक खूबसूरत हवाई झूला बनाया जाएगा.
4 घंटाघर जो ट्रैफिक में बाधा डालता है हटाने की बजाय उस में चारों और बड़े
दरवाजे लगाए जाएंगे जिससे बस आसानी से पार हो सके.
5 गांजा भांग मेथी के भाव बिकेगा तथा शराब मेडिकल स्टोर पर व्यवस्थित रूप से
बिकवाई जाएगी.
6 अपराधों में कमी के लिए अपराधियों को उच्च स्तर पर माफ करने की व्यवस्था
की जाएगी.
7 घास व बैलों की कमी को देखते हुए सूअरों को छोटे किसानों में बांट दिया
जाए उनसे खेती कराई जाएगी.
8 सट्टा रेडियो व टेलीविजन पर प्रसारित व टेलीकास्ट होगा.
9 देवास से नोटों की निकासी रोकी जाएगी ताकि देवास में नोटों की कमी ना रहे.
10 परिवार नियोजन हेतु दस साल तक शादियों पर प्रतिबंध.
11 हेलीकॉप्टर कारखाना देवास में खुलेगा.
12 एक सौ पचास करोड़ लागत का एक क्लब बनाया जाएगा.
सभा की
समाप्ति पर मंच के पीछे से घोषणा होती है.. ‘कृपया पुलिस अधिकारी विधायक जी को
अपने घर तक पहुंचा दें.’
पुलिस भीड़ को
चीरते हुए पोल साहब को अपने साथ ले जाती है. पोल साहब हाथ हिलाकर जनता का अभिवादन
करते जा रहे हैं.
पीछे से नारे
लग रहे हैं ‘देवासरत्न जिंदाबाद’, ‘पोल साहब जिंदाबाद’...
!
(उक्त लेख नईदुनिया समाचार पत्र में 15 जून 1977 को प्रकाशित हुआ था)
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