पेपर लीक :
क्या व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए बारहवीं की परीक्षा आधार बनें !
भारत में मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं (जैसे नीट यूजी 2026) में पेपर लीक होना एक गंभीर मुद्दा है, जो न केवल लाखों छात्रों की मेहनत पर पानी फेर देता है। जब पेपर लीक होता है, तो अयोग्य छात्र पैसे के दम पर सीट हासिल कर लेते हैं। इससे उन मेहनती और योग्य छात्रों का भविष्य बर्बाद हो जाता है जिन्होंने वर्षों तक दिन-रात मेहनत की होती है। बार-बार परीक्षाओं का रद्द होना या धांधली की खबरें आना छात्रों में डिप्रेशन, चिंता और सिस्टम के प्रति अविश्वास पैदा करता है। एक औसत भारतीय परिवार अपने बच्चे को डॉक्टर बनाने के लिए जीवन भर की कमाई लगा देता है। परीक्षा रद्द होने पर कोचिंग, फॉर्म और यात्रा का अतिरिक्त आर्थिक बोझ माता-पिता पर पड़ता है। यदि पेपर लीक की सुविधा से बिना योग्यता वाले लोग डॉक्टर बनेंगे, तो भविष्य में देश की स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर गिरेगा, जो सीधे तौर पर जन-स्वास्थ्य के लिए खतरा है।
केवल मेडिकल परीक्षाओं में ही नहीं हमारे यहां अन्य व्यावसायिक प्रवेश परीक्षाओं में भी ऐसी पेपर लीक हो जाने की घटनाएं होती रहीं हैं। इंजीनियरिंग, शिक्षक भर्ती, पुलिस भर्ती, बैंकिंग और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार सामने आए पेपर लीक मामलों ने युवाओं में निराशा और आक्रोश पैदा किया है।
नीट 2024 के प्रश्नपत्र लीक होने और अनियमितताओं के आरोपों ने पूरे देश में विवाद खड़ा कर दिया। कई राज्यों में गिरफ्तारी हुई और परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्न उठे। यूजीसी नेट (UGC-NET 2024) परीक्षा को सरकार ने रद्द कर दिया क्योंकि इसके प्रश्नपत्र डार्क वेब और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने की आशंका जताई गई। Staff Selection Commission तथा रेलवे भर्ती परीक्षाओं में कई बार तकनीकी गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोप लगे। 2018 में व्यापक छात्र आंदोलन भी हुए। व्यापमं घोटाला भारत के सबसे चर्चित परीक्षा घोटालों में से एक रहा। इसमें मेडिकल प्रवेश, भर्ती परीक्षाओं और फर्जी अभ्यर्थियों के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ। पुलिस भर्ती, पटवारी परीक्षा, शिक्षक भर्ती आदि में भी कई राज्यों में प्रश्नपत्र लीक की घटनाएँ सामने आईं। इससे लाखों परीक्षार्थियों को पुनः परीक्षा देनी पड़ी।
दरअसल, पेपर लीक अब छोटे स्तर की घटना नहीं रह गई है। इसमें कई बार कोचिंग माफिया, साइबर अपराधी, प्रिंटिंग प्रेस कर्मचारी, दलाल और कुछ भ्रष्ट अधिकारी शामिल पाए जाते हैं। संगठित अपराध और भ्रष्टाचार के कारण हमारी परीक्षा प्रणाली कमजोर और असुरक्षित हो गई है। कई बार प्रश्नपत्रों की छपाई, परिवहन और वितरण के दौरान पर्याप्त डिजिटल एवं भौतिक सुरक्षा नहीं होने से गोपनीयता भंग हो जाती है। बेरोजगारी और अत्यधिक प्रतिस्पर्धा के चलते तथा सीमित नौकरियों और सीटों के कारण परीक्षा पास करने का दबाव बहुत अधिक है। कुछ अभ्यर्थी गलत रास्ता अपनाने को लालायित हो जाते हैं। सोशल मीडिया के टेलीग्राम, व्हाट्सऐप, ब्लूटूथ डिवाइस, डार्क वेब और हैकिंग तकनीकों का उपयोग कर प्रश्नपत्र तेजी से विस्तारित होने लगते हैं। अपराधियों को पकड़ लिए जाने के बावजूद लंबी कानूनी प्रक्रिया और दोषसिद्धि दर कम होने के कारण अपराधियों में दंड का डर कम दिखाई देता है।
घटनाओं के हो जाने के बाद एक बना बनाया रवैया अपना लिया जाता है। मामलों की जांच सीबीआई याने केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दी जाती है। इस जांच के परिणाम और दोषियों के खिलाफ कार्यवाही इतनी देर से हो पाती है कि छात्रों की प्रवेश की उम्र ही निकल जाती है।
खबरों के अनुसार हाल ही की 3 मई 2026 को आयोजित नीट यूजी (NEET-UG 2026) परीक्षा पेपर लीक प्रकरण में जांच बहुत तेज हो गई है और इसमें महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, बताया जाता है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले में मास्टरमाइंड्स सहित 5 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन्हें दिल्ली की एक अदालत ने 7 दिनों की CBI हिरासत में भेज दिया है। प्रारंभिक जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि पेपर बाहर से नहीं बल्कि सिस्टम के अंदर से ही लीक किया गया , जिसमें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के किसी करीबी या अंदरूनी व्यक्ति की भूमिका भी हो सकती है।
अब होगा यह कि आरोपियों के खिलाफ वित्तीय जांच शुरू कर दी जाएगी, संदिग्धों के संपत्तियों का पता लगाया जाएगा। सीबीआई द्वारा कई जगहों पर छापेमारी की जाएगी और आरोपियों के पास से आपत्तिजनक दस्तावेज, जाली स्टैम्प और हार्ड डिस्क आदि को अपने कब्जे में लिया जाएगा या यह सब अब तक किया भी जा चुका हो। समाचार है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा फिर से कराने की याचिका को खारिज कर दिया है, लेकिन गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने की बात कही है।
लेकिन ध्यान देने वाली बात तो यह है कि पूर्व में ऐसे मामलों में ऐसी ही कार्यवाहियां होती रही हैं फिर भी बार बार पेपर लीक की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं क्यों हो जाती है? इनका स्थाई निदान करने में सफलता क्यों नहीं मिल पा रही?
यद्यपि सिस्टम को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए विशेषज्ञ अनेक सुझाव देते रहे हैं। तकनीकी, प्रशासनिक और कानूनी सुधार के साथ माफिया की पहचान और उन पर प्रभावी लगाम सख्ती से लगाने की बातें भी खूब कही गईं हैं। पूरी तरह डिजिटल परीक्षा, डिजिटल रूप से प्रश्न पत्रों कुछ मिनट पूर्व परीक्षा केंद्रों पर पहुंचाना जो केवल पास वर्ड की मदद से ही खुल सकें, एआई तथा बायो मीट्रिक तकनीक सत्यापन से डमी कैंडिडेट को रोका जाना साथ ही पकड़े जाने पर 10 साल की जेल और एक करोड़ रुपयों के जुर्माने के सुझाव और नियम कानूनों के उपरांत भी घटनाओं का होना बड़ा प्रश्न चिन्ह लगाता है। संदेह जताया जाता है कि अक्सर पेपर लीक के तार बड़े कोचिंग संस्थानों या संगठित अपराधियों से जुड़े होते हैं। यह सोचा जाना चाहिए कि सरकार द्वारा कोचिंग सेंटरों के लिए सख्त पंजीकरण और निगरानी प्रणाली विकसित करने में देरी क्यों हो जाती है।
मेडिकल और कई व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की पढ़ाई के लिए दुनिया भर में प्रवेश की प्रक्रियाएं अलग-अलग हैं। कई देशों में कठिन प्रवेश परीक्षाएं होती हैं, जबकि कुछ देश ऐसे भी हैं जो केवल स्कूल के अंकों (12वीं या हायर सेकेंडरी) के आधार पर प्रवेश देते हैं।जिन देशों में मेडिकल की पढ़ाई के लिए अलग से कोई प्रवेश परीक्षा नहीं होती (या अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए प्रक्रिया सरल है)। यहाँ मुख्य रूप से 12 वीं कक्षा में भौतिकी , रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान के अंकों के आधार पर प्रवेश मिल जाता है उनमें रूस, चीन, किर्गिस्तान, कजाकिस्तान, रोमानिया, जॉर्जिया देश शामिल हैं। क्या हम व्यावसायिक प्रवेश परीक्षाओं की बजाए इसी तरह हायर सेकेंडरी परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश देने के बारे में एक बार विचार कर सकते हैं? ऐसा होने से हमारी स्कूली शिक्षा का स्तर भी उल्लेखनीय रूप से गुणवत्तापूर्ण हो सकेगा।
बच्चों का भविष्य बचाने के लिए केवल तकनीक काफी नहीं है, बल्कि एक 'नैतिक संस्कृति' विकसित करने की जरूरत है। जब तक परीक्षा कराने वाली एजेंसियां, प्रिंटिंग प्रेस और केंद्र अधीक्षक पूरी ईमानदारी से काम नहीं करेंगे, तब तक पूर्ण सुरक्षा कठिन है। पेपर लीक केवल परीक्षा से जुड़ी तकनीकी समस्या नहीं है, बल्कि यह युवाओं के विश्वास, सामाजिक न्याय और राष्ट्र की प्रतिभा व्यवस्था से जुड़ा गंभीर प्रश्न है। यदि योग्य और मेहनती विद्यार्थियों को न्याय नहीं मिलेगा, तो देश की शिक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर होगी। इसलिए सरकार, परीक्षा एजेंसियों, तकनीकी विशेषज्ञों और समाज को मिलकर ऐसी प्रणाली विकसित करनी होगी जिसमें पारदर्शिता, सुरक्षा और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता हो।
ब्रजेश कानूनगो
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